वालिद की वफ़ात पर
शीर्षक: वालिद की वफ़ात पर (पिता के निधन पर), नाम: लक्ष्मीगोविन्द प्रसाद गुप्ता, जन्म (उदय): 13 अक्टूबर 1936, निधन (अस्त): 19 जनवरी 1996
तुम्हारी क़ब्र पर
मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया
मुझे मालूम था
तुम मर नहीं सकते
तुम्हारी मौत की सच्ची ख़बर जिसने
उड़ाई थी
वो झूठा था
वो तुम कब थे
कोई सूखा हुआ पत्ता हवा से हिल के टूटा था
मेरी आँखें
तुम्हारे मंज़रों में क़ैद है अबतक
मैं जो भी देखता हूँ
सोचता हूँ
वो – वही है
जो तुम्हारी नेकनामी और बदनामी की
दुनियाँ थी
कहीं कुछ भी नहीं बदला
तुम्हारे हाथ
मेरी उँगलियों में साँस लेते हैं
मैं लिखने के लिए
जब भी क़लम काग़ज़ उठाता हूँ
तुम्हें बैठा हुआ अपनी ही कुर्सी में पाता हूँ
बदन में मेरे जितना भी लहू है
वो तुम्हारी
लग्ज़िश–ओ–नाकामियों के साथ बहता है
मेरी आवाज़ में छुपकर
तुम्हारा जेहन रहता है
मेरी बीमारियों में तुम
मेरी लाचारियों में तुम
तुम्हारी क़ब्र पर जिसने तुम्हारा नाम लिखा है
वो झूठा है
तुम्हारी क़ब्र में मैं दफ़न हूँ
तुम मुझ में ज़िन्दा हो
कभी फ़ुर्सत मिले तो फ़ातिहा पढ़ने
चले आना
Your Reaction
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
Leave a Comment