वर्ष् : 2012अंक : 19सोमवार 30 जनवरी 2012

गांधी को अंगीकार कर सिरमौर बन सकता है भारत : डॉ. प्रभात

दरभंगा 30 जनवरी 2012। आकाशवाणी दरभंगा के कार्यक्रम अधिशाषी डॉ. प्रभात नारायण झा ने कहा है कि गांधी वह आस्था और धरोहर है जिसे अंगीकार कर भारत संसार का सिरमौर बन सकता है। डॉ. झा आज जन जागरण परिषद्, दरभंगा के तत्वावधान में महात्मा गांधी एवं स्वतंत्रता सेनानी सहं गांधीवादी डा. ललितेश्वरी चरण सिन्हा के पुण्य स्मृति दिवस पर आयोजित महात्मा ÷गांधी और हमारा लांकतंत्र' विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की पूंजी अहिंसा थी और इसी अंहिसा को सामाजिक हथियार बनाकर उन्होने जहा देश को आजाद कराया वही भारत को मजबूत लोकतंत्र के रूप में विकसित भी किया। उन्होने कहा कि गांधी पूजने की चीज नहीं वरन उन्हें अंगीकार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांधी को अंगीकार नहीं करने के कारण ही हम भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सामूहिक आक्रोश भी व्यक्त नहीं कर पा रहे है। उन्होंने कहा कि आज भारत गांधी से दूर होता जा रहा है और इसी का दुष्परिणाम है कि हम भ्रष्टाचार को स्वाभाविक रूप से स्वीकार कर रहे है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्लस पोलियो अभियान की तरह जन आंदोलन चलाने की जरूरत बताते हुए कहा कि जिसमें त्याग नहीं है है वह भ्रष्टाचार को प्रक्षय देगा ही।
 उन्होने कहा कि आज हर गांधीवादी हतप्रभ और दिगभ्रमित हो रहा है। लोकतंत्र का मूल उद्देश्य सबको समान अवसर प्रदान करना है। लेकिन आज सम्पन्नता चुने हुए लोगों के पास है। तमाम वल संख्यावल के आधर पर हावी हो जाता है। उन्होंने ÷÷गांधी के स्वयं काे बदलो-दुनिया बदल जाएगी'' के सिद्धांत को अपनाने पर जोड़ देते हुए कहा कि जिस प्रकार ज्ञान है और चरित्र नहीं है तो वह हिंसा का जड़ है, उसी तरह बिना त्याग के अध्यात्म अपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वीस बैंक में भारत का करोड़ों रूपया काले धन के रूप में जमा है इसे सभी जान रहे है, लेकिन इसके लिए कही कोई बेचैनी नहीं है। एैसी स्थिति में भ्रष्टाचार का सहारा लेने वालों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशों में भ्रष्टाचार के सवाल पर कई सरकारे गिरी है, लेकिन इस तरह की घटनाए मौजूद सत्ताधरियों के लिए सबक नहीं बन पा रहा है।
 स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 धर्मेन्द्र कुमर ने कहा कि भारत का लोतंत्र कारपोरेट जगत के चंगुल में पफस गया है और हम मात्र उपभोक्ता बनकर रह गये है। पूर्व स्वातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अजित कुमार वर्मा ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी ने कभी अपने आप को परिपूर्ण नहीं समझा, वह रोज नये सत्य की तलाश करते रहे। संगोष्ठी के पूर्व महात्मा गांधी एवं गांधीवादी डा. ललितेश्वरी चरण सिन्हा के तैलचित्र पर पुष्प एवं माला अर्पित किया गया।
 संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक अमरेश्वरी चरण सिन्हा ने किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन साहित्यकार शंभू अगेही ने किया। सर्वोदय कार्यकर्ता पलटन आजाद ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की।